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देश में बढ़ती GPS स्पूफिंग घटनाओं पर अलर्ट — पायलटों और एयरलाइंस को 10 मिनट में रिपोर्ट करने के निर्देश

12/11/2025  Rajat Singh  31 views

भारत में बढ़ती GPS स्पूफिंग (GPS नकली सिग्नल भेजने) की घटनाओं को देखते हुए अब देश की विमानन और सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क मोड में आ गई हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट के पास पिछले सप्ताह एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के नेविगेशन सिस्टम में अचानक GPS सिग्नल गड़बड़ होने के बाद, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एक आपात सलाह (Advisory) जारी की है।

इसमें सभी एयरलाइंस, हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) और पायलटों को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी उड़ान के दौरान GPS में संदिग्ध हस्तक्षेप (Interference) पाया जाए, तो उसे 10 मिनट के भीतर रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

🛰️ क्या है GPS स्पूफिंग?

GPS स्पूफिंग एक प्रकार का साइबर हमला है, जिसमें किसी उड़ान, जहाज या वाहन के वास्तविक नेविगेशन सिग्नल में झूठे GPS सिग्नल भेजकर दिशा या स्थान को भ्रमित किया जाता है।

ऐसी गतिविधियाँ न केवल उड़ान सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

GPS सिग्नल उपग्रहों से भेजे जाते हैं, लेकिन यदि कोई बाहरी डिवाइस उन्हीं फ़्रीक्वेंसी पर नकली सिग्नल भेजे, तो विमान का सिस्टम उसे वास्तविक मान सकता है — यही “स्पूफिंग कहलाती है।

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⚠️ हाल की घटनाएँ — दिल्ली और उत्तर भारत में बढ़ी चिंताएँ

हाल ही में दिल्ली एयरपोर्ट के आसमान में उड़ान भरते समय दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों — एक यूरोपीय और एक एशियाई एयरलाइन — ने रिपोर्ट किया कि नेविगेशन डिस्प्ले पर विमान की स्थिति अस्थिर दिखाई दे रही थी।

बाद में जांच में पाया गया कि GPS सिग्नल कुछ मिनटों के लिए “जैम” या “स्पूफ” हुए थे।

इससे पहले भी, लद्दाख और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में GPS सिग्नल गड़बड़ी के कुछ मामले सामने आए थे।

रक्षा मंत्रालय ने इसे इलेक्ट्रॉनिक जामिंग या सिग्नल इंटरफेरेंस की संभावना माना था।

🧭 DGCA और गृह मंत्रालय की संयुक्त कार्रवाई

DGCA ने सभी एयरलाइंस से कहा है कि अब हर उड़ान के दौरान नेविगेशन सिस्टम की स्थिति को बारीकी से मॉनिटर किया जाए।

यदि कोई असामान्यता दिखे — जैसे अचानक दिशा परिवर्तन, सिग्नल लॉस, या ऑटो-पायलट सिस्टम की त्रुटि — तो उसे तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और DGCA मुख्यालय को सूचित किया जाए।

गृह मंत्रालय और इंडियन एयरफोर्स (IAF) भी इन घटनाओं की समानांतर जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि सिग्नल की उत्पत्ति कहां से हो रही है।

🗣️ DGCA का बयान:

DGCA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा —

> “पायलटों और एयरलाइंस को 10 मिनट में रिपोर्ट करने का निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि वास्तविक समय में जांच और कार्रवाई की जा सके।

देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हर संदिग्ध GPS सिग्नल को अब ट्रैक कर रही हैं।”

अधिकारियों के अनुसार, यह सलाह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, क्योंकि यूरोप, अमेरिका और इजराइल जैसे देशों में भी GPS spoofing को लेकर चेतावनी जारी की जा चुकी है।

🔐 साइबर सुरक्षा का नया खतरा — तकनीकी मोर्चे पर तैयारी

GPS स्पूफिंग की बढ़ती घटनाएँ केवल विमानन सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन, स्वचालित वाहन (autonomous vehicles), और नौसेना के जहाजों के लिए भी ऐसे हमलों से सुरक्षा बेहद जरूरी होगी।

भारत में अब DGCA, CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) और ISRO के बीच एक संयुक्त तकनीकी कार्यदल (task force) बनाने की योजना है जो GPS spoofing की निगरानी और रोकथाम के लिए मानक प्रोटोकॉल तैयार करेगा।

✈️ पायलट समुदाय की प्रतिक्रिया

कई पायलट संगठनों ने DGCA के कदम का स्वागत किया है।

एक सीनियर कमर्शियल पायलट ने कहा —

> “पिछले कुछ महीनों से हम अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में GPS सिग्नल में अस्थिरता देख रहे थे।

DGCA का यह कदम जरूरी और समयानुकूल है क्योंकि उड़ान सुरक्षा में सेकंडों का अंतर भी निर्णायक होता है।”

🇮🇳 अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में भारत की तैयारी

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान GPS spoofing और जामिंग की घटनाएँ तेजी से बढ़ीं थीं।

अब भारत ने भी इन घटनाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में लाने का निर्णय लिया है।

विमानन मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपने सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स और एयर कॉरिडोर्स पर

“GPS integrity monitoring systems” लगाएगा, जो हर सिग्नल को वास्तविक समय में जांचेंगे।

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🧭 निष्कर्ष:

GPS स्पूफिंग का खतरा अब केवल टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा — यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक उड्डयन सुरक्षा दोनों से जुड़ा विषय बन चुका है।

DGCA का 10 मिनट रिपोर्टिंग निर्देश इस दिशा में एक प्रोएक्टिव कदम है, जो भारत को संभावित साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी स्थितियों के लिए तैयार करता है।

> अब देखना यह होगा कि देश का विमानन क्षेत्र इस चुनौती से कितनी तेजी और कुशलता से निपट पाता है —

क्योंकि उड़ान की सुरक्षा, तकनीक की सटीकता पर ही टिकी है।


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