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नरकटियागंज में झोला छाप डॉक्टरों की लापरवाही से 22 वर्षीय महिला की मौत, अवैध अस्पताल सील

06/01/2026  Ravishankar Kumar  330 views

झोला छाप डॉक्टरों के कारण हर माह जा रही मरीजों की जान, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

नरकटियागंज (पश्चिमी चंपारण): शहर में झोला छाप डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों की लापरवाही लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। ताज़ा मामला नरकटियागंज के सुमन विहार स्थित ‘इमरजेंसी हॉस्पिटल’ से सामने आया है, जहां 22 वर्षीय महिला की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, महिला का ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया था। ऑपरेशन के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उसे पहले बेतिया रेफर किया। बेतिया से हालत में सुधार न होने पर मरीज को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के डायरेक्टर सद्दाम हुसैन पर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल के सभी डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए, जिससे परिजनों का संदेह और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है।

हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों को सील करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। आरोप है कि ऐसे अस्पताल कुछ दिनों बाद फिर से दलालों के सहारे नए नाम से संचालित होने लगते हैं, जो बेहद चिंताजनक और निंदनीय है।

शहरवासियों के अनुसार, नरकटियागंज में बड़ी संख्या में झोला छाप डॉक्टर सक्रिय हैं, जो दलालों के माध्यम से मरीजों को अपने क्लीनिक या अवैध अस्पतालों तक पहुंचाते हैं। मोटी कमाई के लालच में ये स्वास्थ्य माफिया किसी की बेटी, मां और पत्नी की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हर कुछ महीनों में इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव सवालों के घेरे में है।

नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन घटना के बाद अस्थायी कार्रवाई तो करता है, लेकिन अवैध अस्पतालों और फर्जी डॉक्टरों पर नियमित निगरानी या सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती। इस कारण शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर मौत का खेल बार-बार दोहराया जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना के बाद क्या सख्त कदम उठाता है और क्या झोला छाप डॉक्टरों तथा अवैध अस्पतालों के नेटवर्क पर पूर्ण विराम लग पाता है, या यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

रवि शंकर यादव की रिपोर्ट नरकटियागंज से


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