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बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 9 जनवरी 2026 को दर्जनों IAS/भा.प्र.से अधिकारियों का तबादला

10/01/2026  Ravishankar Kumar  156 views

बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 09 जनवरी 2026 की अधिसूचना से बदली कई जिलों की कमान

पटना।
बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 09 जनवरी 2026 को जो आदेश जारी किया, उसने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी। वर्षों से जमी हुई व्यवस्था को तोड़ते हुए सरकार ने एक साथ बिहार प्रशासनिक सेवा (भा.प्र.से.) के कई वरिष्ठ और युवा अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह महज़ रूटीन ट्रांसफर नहीं बल्कि शासन को और चुस्त-दुरुस्त बनाने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है।

इस अधिसूचना के तहत संख्या–1/पीठ–1001/2026–सामो–599 से लेकर संख्या–1/पीठ–1001/2026–सामो–621 तक कुल 23 आदेश जारी किए गए हैं, जिनका सीधा असर जिला परिषद, नगर निगम और अनुमंडल स्तर की प्रशासनिक संरचना पर पड़ेगा।

पटना से कम्फेड तक – समीर सौरभ को मिली अहम जिम्मेदारी

इस सूची में सबसे पहला और अहम नाम है श्री समीर सौरभ, भा.प्र.से. (2019) का। उन्हें उप विकास आयुक्त–सह–मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, पटना से हटाकर प्रबंध निदेशक, कम्फेड, पटना के पद पर भेजा गया है। राज्य में दुग्ध उत्पादन और सहकारी क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले कम्फेड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी अब समीर सौरभ के कंधों पर है। माना जा रहा है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए इस सेक्टर पर विशेष फोकस कर रही है।

सचिवालय में बढ़ी गतिविधि – दीपक कुमार मिश्रा को डबल रोल

इसी कड़ी में श्री दीपक कुमार मिश्रा, भा.प्र.से. (2019) को नगर आयुक्त, नालंदा से हटाकर संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय, बिहार बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें बिहार विकास मिशन में अपर निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इससे साफ है कि सरकार योजनाओं की मॉनिटरिंग अब सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय से करना चाहती है।

गया और बिहार शरीफ में नई टीम

श्री अभिषेक पलासिया, भा.प्र.से. (2020) को खगड़िया जिला परिषद से हटाकर गया नगर निगम का नगर आयुक्त बनाया गया है। बोधगया और पितृपक्ष मेला जैसे बड़े आयोजनों वाले शहर गया के लिए यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है।
वहीं श्री कुमार निशांत विवेक, भा.प्र.से. (2020) को गोपालगंज जिला परिषद से बिहार शरीफ नगर निगम की कमान सौंपी गई है।

राजधानी पटना के ग्रामीण क्षेत्र पर फोकस

राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों के विकास की जिम्मेदारी अब श्री श्रीकांत कुण्डलिक खांडकेर, भा.प्र.से. (2020) संभालेंगे, जिन्हें नालंदा जिला परिषद से हटाकर पटना जिला परिषद का उप विकास आयुक्त बनाया गया है।

पश्चिम चंपारण और समस्तीपुर में बड़ा बदलाव

मुंगेर से हटाकर सुश्री शिवांशी दीक्षित, भा.प्र.से. (2021) को बेतिया नगर निगम भेजा गया है। बेतिया तेजी से बढ़ता शहर है और वहां शहरी अव्यवस्था को दुरुस्त करना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
इसी तरह कैमूर-भभुआ से हटाकर श्री सूर्य प्रताप सिंह, भा.प्र.से. (2021) को समस्तीपुर जिला परिषद का प्रभारी बनाया गया है।

सारण को मिला नया नेतृत्व

बेतिया नगर निगम से हटाकर श्री लक्ष्मण तिवारी, भा.प्र.से. (2021) को जिला परिषद, सारण (छपरा) की जिम्मेदारी दी गई है। छपरा जिले में पंचायत और ग्रामीण विकास योजनाओं को तेज करने की बड़ी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है।

मुंगेर, मोतिहारी और भागलपुर नगर निगम में फेरबदल

श्री पार्थ गुप्ता, भा.प्र.से. (2022) को पूर्णिया से हटाकर मुंगेर नगर निगम का नगर आयुक्त बनाया गया है।
श्री आशीष कुमार, भा.प्र.से. (2022) को बाढ़ से मोतिहारी नगर निगम भेजा गया है, जबकि श्री किसलय कुशवाहा, भा.प्र.से. (2022) को महुआ से हटाकर भागलपुर नगर निगम का नगर आयुक्त बनाया गया है।

गोपालगंज जिला परिषद को नया कप्तान

बगहा से हटाकर श्री गौरव कुमार, भा.प्र.से. (2022) को जिला परिषद, गोपालगंज की जिम्मेदारी दी गई है। सीमावर्ती जिला होने के कारण गोपालगंज प्रशासनिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

युवा अफसरों को दी गई कानून-व्यवस्था की कमान

सरकार ने 2023 बैच के युवा अधिकारियों पर भी भरोसा जताया है। सुश्री गरिमा लोहिया को पालीगंज से बाढ़ का एसडीओ बनाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी गई हैं।
इसी तरह श्री अनिरुद्ध पाण्डेय को मोहनिया से दानापुर का एसडीओ बनाया गया है और उन्हें भी वही शक्तियां सौंपी गई हैं। इसके अलावा सुश्री कृतिका मिश्रा, सुश्री आकांक्षा आनंद और श्री रोहित वर्मा को भी अलग-अलग अनुमंडलों में पदस्थापित करते हुए कानून-व्यवस्था से जुड़ी शक्तियां दी गई हैं।

सरकार का संदेश साफ

इस पूरे फेरबदल से सरकार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है – अब जिले और नगर निगमों में सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विकास योजनाओं में तेजी, शहरी व्यवस्था में सुधार और कानून-व्यवस्था को चुस्त रखने के लिए सरकार ने नए चेहरों को मैदान में उतारा है।

अब देखना यह है कि नई जिम्मेदारियों के साथ ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कितना बदलाव ला पाते हैं। बिहार की जनता को उम्मीद है कि यह प्रशासनिक फेरबदल कागज़ों तक सीमित न रहकर ज़मीन पर भी दिखेगा।


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