Adda Junction - Latest News, Blogs & Stories from India and Beyond | अड्डा जंक्शन – देश-दुनिया की ताज़ा खबरें और ब्लॉग्स

Header

नई दिल्ली 🏛️

Loading...

लखनऊ 🕌

Loading...

पटना 🏯

Loading...

collapse
...
Home / राजनीति / तस्लीमा नसरीन का बड़ा सवाल — शेख हसीना को अपराधी क्यों बताया गया, और मुहम्मद यूनुस पर खामोशी क्यों?

तस्लीमा नसरीन का बड़ा सवाल — शेख हसीना को अपराधी क्यों बताया गया, और मुहम्मद यूनुस पर खामोशी क्यों?

18/11/2025  Anish Srivastava  145 views

बांग्लादेश की सियासत इन दिनों उथल-पुथल से भरी है। देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीति ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी गहरी बहस शुरू हो गई है। वहीं निर्वासन में रह रहीं प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस फैसले को सीधा-सीधा चुनौती देते हुए एक बड़ा सवाल उठाया है—

“जब आदेश देने वाले यूनुस सरकार के लोग नहीं अपराधी, तो शेख हसीना कैसे अपराधी?”

यह सवाल सिर्फ न्यायिक व्यवस्था पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता संरचना पर भी तीखा प्रहार है।

20251118_162708
 

हसीना के खिलाफ क्या आरोप हैं?

बीते साल हुए छात्र आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए शेख हसीना को जिम्मेदार माना गया। अदालत ने कहा कि हसीना ने हिंसा को रोकने के बजाय कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए। उन पर तीन प्रमुख आरोप साबित हुए—

  1. हिंसा भड़काने का आरोप
  2. प्रदर्शनकारियों को मारने का आदेश देने का आरोप
  3. अत्याचार रोकने में विफल रहने का आरोप

78 वर्षीय हसीना बीते 15 साल तक सत्ता में रहीं और अगस्त 2024 में विरोध प्रदर्शन के बीच देश छोड़कर भारत आ गई थीं। अब दिल्ली में निर्वासन-जीवन जी रहीं हसीना ने फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

तस्लीमा नसरीन का तर्क — “सब कुछ एकतरफा चाल है

तस्लीमा नसरीन, जो 1994 से भारत में निर्वासन में हैं, ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हसीना को अपराधी करार देने वाली वही ताकतें खुद हिंसा और दमन के लिए जिम्मेदार थीं।

उनका स्पष्ट आरोप है कि अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस और उनकी 'जिहादी शक्तियाँ' छात्रों पर गोली चलाने के आदेश देने में शामिल थे, लेकिन आज उन पर कोई मुकदमा नहीं चल रहा।

तस्लीमा का सवाल है—

“अगर आंदोलनकारियों पर गोली चलाना अपराध है, तो फिर यूनुस और उनके समर्थक निर्दोष कैसे?”

उनका कहना है कि राजनीतिक प्रतिशोध को न्याय का नाम दिया जा रहा है, और यह बांग्लादेश के न्यायिक ढांचे पर बड़ा धब्बा है।

IMG_20251118_163141
 

यूनुस पर तस्लीमा की तीखी नाराज़गी

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मुहम्मद यूनुस इन दिनों बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया हैं। तस्लीमा लगातार यूनुस पर आरोप लगाती रही हैं कि—

  • उन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया,
  • विरोधियों पर दमन किया,
  • और सत्ता पाने के लिए हिंसा को बढ़ावा दिया।

तस्लीमा ने यहां तक मांग की कि यूनुस का नोबेल पुरस्कार वापस लिया जाए।

अदालत का फैसला और राजनीतिक परिणाम

इस फैसले के साथ ही पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी मौत की सजा मिली है। वहीं पूर्व पुलिस प्रमुख चोधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच साल की जेल दी गई है, जिन्होंने सरकारी गवाह बनने का विकल्प चुना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा। हसीना की पार्टी—आवामी लीग—को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है, जिससे राजनीतिक समीकरण बिल्कुल उलट गए हैं।

20251118_162748
 

बांग्लादेश का भविष्य—अनिश्चित दिशा में

एक ओर यूनुस कहते हैं कि “कानून के आगे कोई बड़ा नहीं”, वहीं हसीना का कहना है कि “यह अदालत लोकतंत्र का मज़ाक है।”

इस बीच तस्लीमा नसरीन की आवाज़ फिर गूंज उठी है। उनका तर्क स्पष्ट है—

“अगर न्याय सच में न्याय है, तो दोष सभी के गिने जाने चाहिए। एक को अपराधी और दूसरे को देवता बताना लोकतंत्र का अपमान है।”

बांग्लादेश इस समय एक ऐसे मोड़ पर है जहां सत्ता, न्याय और जनभावनाएँ टकरा रही हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा भूचाल ला सकता है।


Share:

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy