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निमुस्लाइड दवा पर सरकार की सख्त रोक, बुखार और दर्द की यह दवा क्यों बन रही है जानलेवा?

03/01/2026  Ravishankar Kumar  337 views
निमुस्लाइड दवा पर सरकार की सख्त रोक, बुखार और दर्द की यह दवा क्यों बन रही है जानलेवा?

भारत में लंबे समय से बुखार और दर्द की आम दवा के तौर पर इस्तेमाल हो रही निमेसुलाइड (Nimesulide) अब गंभीर खतरे की वजह बनती जा रही है। इसी को देखते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दवा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार ने 100 ग्राम से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड से जुड़ी किसी भी दवा के निर्माण, बिक्री और खरीद पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, अब दवा कंपनियां इस सीमा से अधिक मात्रा वाली निमेसुलाइड का निर्माण नहीं कर सकेंगी और न ही मेडिकल स्टोर पर इसकी बिक्री की अनुमति होगी। इतना ही नहीं, जिन दवा विक्रेताओं के पास पहले से इसका स्टॉक मौजूद है, वे भी इसे बेच नहीं सकते। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित दवा विक्रेता या कंपनी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, निमेसुलाइड को लेकर चिंताएं कोई नई नहीं हैं। यह दवा पहले से ही बच्चों के लिए प्रतिबंधित थी, क्योंकि इसके सेवन से गंभीर साइड इफेक्ट्स सामने आ रहे थे। अब सरकार ने इसे वयस्कों के लिए भी असुरक्षित मानते हुए बैन करने का फैसला लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, निमेसुलाइड के लगातार या अधिक मात्रा में सेवन से लीवर और किडनी पर गहरा और खतरनाक प्रभाव पड़ता है। कई मामलों में यह देखा गया है कि इस दवा के कारण लीवर डैमेज और किडनी फेल होने जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हुई हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह दवा शरीर में विषैले प्रभाव पैदा कर सकती है, जिससे मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। खासतौर पर वे लोग जो पहले से लीवर या किडनी से जुड़ी किसी बीमारी से पीड़ित हैं, उनके लिए निमेसुलाइड बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। इसी वजह से सरकार ने एहतियातन यह फैसला लिया है ताकि आम जनता की सेहत को सुरक्षित रखा जा सके।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। उनका मानना है कि दर्द और बुखार के इलाज के लिए बाजार में कई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं, ऐसे में एक ऐसी दवा का इस्तेमाल जारी रखना, जो जानलेवा साबित हो सकती है, पूरी तरह गलत है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें और खासतौर पर निमेसुलाइड वाली किसी भी कंपोजिशन से दूर रहें।

सरकार की ओर से आम जनता से भी अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और यदि किसी दवा में निमेसुलाइड मौजूद हो तो उसका सेवन न करें। बुखार या दर्द होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श जरूर करें, ताकि सुरक्षित और सही इलाज मिल सके।

कुल मिलाकर, निमेसुलाइड पर लगाया गया यह प्रतिबंध जनस्वास्थ्य के हित में उठाया गया एक जरूरी कदम माना जा रहा है। यह फैसला न केवल दवा कंपनियों और विक्रेताओं के लिए एक सख्त संदेश है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि हर आसानी से मिलने वाली दवा सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। सेहत के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।


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