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नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का खेल बेनकाब, इमरजेंसी अस्पताल सील होने के बाद जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी गई

09/01/2026  Ravishankar Kumar  18 views

नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का खेल जारी, इमरजेंसी अस्पताल सील होने के बाद जिला मुख्यालय भेजी गई जांच रिपोर्ट

नरकटियागंज:

झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच नरकटियागंज नगर स्थित इमरजेंसी अस्पताल को सील किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेज दी है। यह कार्रवाई हाल ही में एक महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद की गई थी, जिसे लेकर शहरभर में आक्रोश और सवाल खड़े हुए थे।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में अस्पताल के बाहर लगाए गए बोर्ड, वहां लिखे डॉक्टरों के नाम, जदयू के सचिव और नेशनल ह्यूमन राइट्स के बोर्ड के माध्यम से अस्पताल संचालन जैसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अस्पताल पूरी तरह से अवैध तरीके से संचालित हो रहा था।

उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि 5 जनवरी को चतुर्भुजवा गांव की रहने वाली प्रियंका देवी की इलाज के दौरान मौत के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया था। इसके बाद सिविल सर्जन को पूरे प्रकरण की रिपोर्ट भेजी गई है और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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शहर में इस बात की भी चर्चा है कि संबंधित चिकित्सक सद्दाम हुसैन ने 3 सितंबर 2021 को अस्पताल सील होने के बावजूद पार्टी और नेशनल ह्यूमन राइट्स के नाम पर दोबारा अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया था। इसी अवैध संचालन के दौरान महिला की मौत हुई, जिससे झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क की एक बार फिर पोल खुल गई है।

मृतका के परिजनों ने 6 जनवरी को नरकटियागंज पहुंचकर जमकर हंगामा किया था। शिकारपुर थाना में मृतका की मां मुसम्मात सुहाना देवी ने डॉ. सद्दाम हुसैन के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है।

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इस पूरे मामले को उसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां पहले भी झोलाछाप डॉक्टरों के कारण हर माह मरीजों की जान जाने की बात सामने आती रही है। बावजूद इसके, अवैध अस्पताल बंद होने के कुछ ही दिनों बाद दोबारा संचालित हो जाते हैं।

फिलहाल, महिला की मौत के बाद इमरजेंसी अस्पताल से जुड़े सभी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी फरार बताए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। जिला प्रशासन का कहना है कि अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।


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