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नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का काला खेल बेनकाब, इमरजेंसी हॉस्पिटल कांड ने खोली सिस्टम की पोल

09/01/2026  Ravishankar Kumar  20 views

नरकटियागंज में झोलाछाप डॉक्टरों का काला खेल बेनकाब

फर्जी बोर्ड, राजनीति और मानवाधिकार के नाम पर अवैध संचालन, महिला की मौत के बाद भी प्रशासन पर सवाल

नरकटियागंज (पश्चिमी चंपारण):
नरकटियागंज शहर में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों का नेटवर्क एक बार फिर उजागर हो गया है। हाल ही में इमरजेंसी अस्पताल में इलाज के दौरान चतुर्भुजवा गांव की प्रियंका देवी की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी पहचान के सहारे चलता रहा “इमरजेंसी हॉस्पिटल”

अस्पताल के बाहर लगे बड़े‑बड़े बोर्डों पर कई डॉक्टरों के नाम, MBBS, DGO, MS जैसी डिग्रियां और रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित थे। देखने से यह अस्पताल किसी बड़े मल्टी‑स्पेशलिटी सेंटर जैसा प्रतीत होता था।
लेकिन विभागीय जांच में यह सामने आया कि यह संस्थान पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित हो रहा था।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि अस्पताल के संचालन के लिए

  • राजनीतिक दल से जुड़े पदों का उल्लेख,
  • नेशनल ह्यूमन राइट्स जैसे बोर्ड,
  • और नामचीन डॉक्टरों की डिग्रियों का सहारा लिया गया था,
    ताकि आम जनता को यह विश्वास दिलाया जा सके कि यह एक पंजीकृत और भरोसेमंद अस्पताल है।

पहले भी हो चुका था सील, फिर कैसे खुला?

सूत्रों के अनुसार, यह अस्पताल पहले भी 3 सितंबर 2021 को सील किया गया था। इसके बावजूद संबंधित संचालक सद्दाम हुसैन ने पार्टी और मानवाधिकार संगठनों के नाम का सहारा लेकर दोबारा अस्पताल शुरू कर दिया।
यही नहीं, इस अवैध संचालन के दौरान ही महिला की मौत हुई, जिसने पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी।

हत्या का मामला दर्ज, आरोपी फरार

मृतका की मां मुसम्मात सुहाना देवी ने 6 जनवरी को शिकारपुर थाना पहुंचकर अस्पताल संचालक के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है।
घटना के बाद से अस्पताल से जुड़े सभी डॉक्टर और कर्मचारी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है।

जिला मुख्यालय भेजी गई जांच रिपोर्ट

उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि 5 जनवरी को महिला की मौत के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया था और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सिविल सर्जन के माध्यम से जिला मुख्यालय भेज दी गई है
रिपोर्ट में अस्पताल के बाहर लगे बोर्ड, डॉक्टरों के नाम, अवैध संचालन की शैली और गुमराह करने के तमाम हथकंडों का उल्लेख है।

हर दो‑चार महीने में एक मौत, फिर भी सिस्टम खामोश

यह कोई पहला मामला नहीं है। शहर में चर्चा है कि हर कुछ महीनों में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से किसी न किसी मरीज की जान जाती है।
अस्पताल सील होते हैं, हंगामा होता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही अस्पताल नए नाम और नए बोर्ड के साथ फिर चालू हो जाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल

क्या गरीब और भोले‑भाले मरीजों की जान इसी तरह राजनीति, फर्जी बोर्ड और झोलाछाप डॉक्टरों के हवाले होती रहेगी?
या इस बार प्रियंका देवी की मौत प्रशासन को सचमुच कुछ ठोस और स्थायी कार्रवाई के लिए मजबूर करेगी?

फिलहाल पूरे नरकटियागंज की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


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