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बंगाल में फिर सियासी भूचाल, तृणमूल आईटी सेल प्रमुख के घर-ऑफिस पर ईडी की छापेमारी

09/01/2026  Ramesh Srivastava  29 views

बंगाल में फिर सियासी बवाल, तृणमूल आईटी सेल प्रमुख के घर-ऑफिस पर ईडी की छापेमारी के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा

कोलकाता/नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आईटी सेल प्रमुख और पार्टी के रणनीतिकार प्रताप जैन के घर और दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के सिलसिले में की गई।

ईडी की दो टीमें बुधवार तड़के करीब सुबह 5 बजे कोलकाता के लायडन स्ट्रीट स्थित प्रताप जैन के आवास और साल्टलेक स्थित उनके कार्यालय पर पहुंचीं। सूत्रों के मुताबिक, टीमों ने सबसे पहले आवास की तलाशी शुरू की और फिर ऑफिस में दस्तावेजों व डिजिटल डिवाइस की गहन जांच की।

छापेमारी की खबर मिलते ही पहुंचीं ममता बनर्जी

जैसे ही छापेमारी की सूचना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मिली, वह स्वयं मौके पर पहुंच गईं। पहले वह प्रताप जैन के घर गईं, फिर साल्टलेक स्थित कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों से बात की। इस दौरान ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह सब कुछ राजनीतिक साजिश और बदले की राजनीति के तहत किया जा रहा है।

ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार राज्य में चुनाव से पहले दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की टीम ने जबरन घर और दफ्तर में घुसकर लोगों को डराने का प्रयास किया है।

कई फाइलें और दस्तावेज जब्त

ईडी के सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण फाइलें, डिजिटल डाटा और दस्तावेज जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि इन दस्तावेजों में ऐसे सुराग मिले हैं जो कथित कोयला तस्करी से अर्जित पैसों को राजनीतिक फंडिंग से जोड़ते हैं।

ईडी का दावा है कि इस घोटाले से निकली रकम को एक संगठित नेटवर्क के जरिए घुमाया गया और अंततः इसका इस्तेमाल चुनावी रणनीतियों व प्रचार में किया गया। एजेंसी को शक है कि यह रकम आई-पैक (IPAC) जैसे चुनावी प्रबंधन समूहों तक भी पहुंची।

कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

इस केस से जुड़े कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिनमें कोलकाता के अलावा अन्य जिलों के कुछ ठिकाने भी शामिल बताए जा रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई नवंबर 2020 में दर्ज एक एफआईआर और उसके बाद शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।

राजनीतिक घमासान तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद टीएमसी नेताओं ने ईडी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर कोई गलत नहीं है तो उन्हें जांच से डरने की जरूरत नहीं, लेकिन जिस तरह मुख्यमंत्री के सामने इस तरह की कार्रवाई की जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और यदि आरोप निराधार हैं तो टीएमसी को जांच में सहयोग करना चाहिए।

फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


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