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फॉर्मर ID कार्ड बनाने में हो रही है दिक्कत, हजारों किसान अब भी कार्ड से वंचित

11/01/2026  Ravishankar Kumar  155 views

कागज़ी उलझनों में फंसी किसान पहचान योजना, हजारों किसान अब भी पहचान पत्र से वंचित

राज्य में किसानों के लिए शुरू की गई पहचान पत्र योजना का उद्देश्य था कि हर किसान को एक विशिष्ट पहचान मिले, जिससे उसे सरकारी योजनाओं, अनुदान और सहायता राशि का लाभ आसानी से मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कागज़ी प्रक्रियाओं, रिकॉर्ड की त्रुटियों और प्रशासनिक ढिलाई के कारण बड़ी संख्या में किसान अब भी किसान पहचान पत्र से वंचित हैं।

सबसे बड़ी समस्या जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सामने आ रही है। कई किसानों के पास वर्षों से खेती की जमीन है, लेकिन उनके नाम जमाबंदी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं हैं। कहीं पुराने नाम दर्ज हैं तो कहीं हिस्सेदारी को लेकर विवाद है। ऐसे में किसान पहचान पत्र के लिए जब आवेदन किया जाता है, तो सिस्टम में उनके दस्तावेज अमान्य हो जाते हैं और प्रक्रिया वहीं अटक जाती है।

ग्रामीण इलाकों में किसान दिन-प्रतिदिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। राजस्व कार्यालय, अंचल कार्यालय और कृषि विभाग के बीच तालमेल की कमी से किसान परेशान हैं। एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजे जाने के कारण न तो उनका काम समय पर होता है और न ही उन्हें यह स्पष्ट जानकारी मिलती है कि आखिर गलती कहां है।

कई किसानों का कहना है कि वे सालों से लगान भरते आ रहे हैं, लेकिन फिर भी उनके नाम से जमीन का रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया। इस वजह से जब किसान पहचान पत्र बनवाने जाते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि पहले अपने जमीन के कागजात दुरुस्त कराएं। यह प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि आम किसान के लिए इसे पूरा करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रशासन द्वारा विशेष शिविर भी लगाए गए, लेकिन इन शिविरों में भी अपेक्षित परिणाम नहीं निकल पाए। शिविरों में पहुंचे किसानों से कई तरह के अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए, जिनकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई।

जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को सही नहीं किया गया, तो किसान पहचान योजना अपने उद्देश्य से भटक जाएगी। पहचान पत्र के बिना किसान कई कल्याणकारी योजनाओं से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक नुकसान होना तय है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान पहचान पत्र केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि किसानों के हक और सम्मान से जुड़ा मामला है। यह कार्ड उन्हें सरकारी तंत्र से जोड़ता है और उनकी पहचान को एक आधिकारिक स्वरूप देता है। ऐसे में इसके निर्माण में हो रही देरी किसानों के भरोसे को तोड़ रही है।

प्रशासन के स्तर पर अब इस समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है। राजस्व और कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करना होगा। इसके अलावा किसानों को एक ही जगह सभी जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी होगी, ताकि उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

अगर जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसान पहचान योजना सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह जाएगी और जिन किसानों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलना चाहिए, वही इससे वंचित रह जाएंगे।


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