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बिहार में दूसरे चरण का प्रचार थमा — 122 सीटों पर दिग्गजों की किस्मत EVM में होगी कैद

10/11/2025  Ravishankar Kumar  216 views

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है।

दूसरे चरण के मतदान के लिए सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों का प्रचार-प्रसार आज शाम थम गया है।

अब 11 नवंबर को 122 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसके साथ ही इस चरण का चुनाव संपन्न हो जाएगा।

पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के बाद अब दूसरे चरण में भी भारी मतदान की उम्मीद जताई जा रही है।

बिहार के चुनावी मैदान में इस बार जोश, ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा, सभी का संगम देखने को मिला है।

हर प्रत्याशी ने मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी — चाहे वह जनसभाएं हों, पदयात्राएँ हों या सोशल मीडिया प्रचार।

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🎯 दूसरे चरण की मुख्य बातें:

इस चरण में 122 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है।

दूसरे चरण में बिहार के उत्तर और मध्य भाग के कई राजनीतिक रूप से अहम जिले शामिल हैं।

पहले चरण के रुझानों से प्रेरित होकर सभी दलों ने दूसरे चरण में पूरी ताकत झोंक दी।

अब प्रचार थमने के बाद प्रत्याशी डोर-टू-डोर संपर्क और शांत रणनीति पर ध्यान दे रहे हैं।

🧩 दूसरे चरण में दिग्गज नेताओं की साख दांव पर:

इस चरण में बिहार की राजनीति के कई बड़े और चर्चित नामों का भविष्य EVM में बंद होने वाला है —

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पूर्व उप मुख्यमंत्री रेणु देवी

 

पूर्व मंत्री विनय बिहारी

पूर्व मंत्री नारायण साह

मंत्री प्रेम कुमार

मंत्री लेसी सिंह

पूर्व मंत्री नीरज सिंह

मंत्री कृष्णानंद पासवान

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यूट्यूबर मनीष कश्यप

जयंत कुमार

इन नेताओं की सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प बताया जा रहा है।

कई सीटों पर तीन-कोणीय मुकाबला भी देखने को मिल रहा है।

📊 मतदान का उत्साह और जनता का रुझान:

पहले चरण में लगभग 64.6 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो बिहार के इतिहास में अब तक का सबसे ऊँचा रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूसरे चरण में भी 60 प्रतिशत से ऊपर वोटिंग हो सकती है।

इससे यह साबित होता है कि जनता अब सक्रिय रूप से चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी कर रही है।

युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बार सबसे अधिक देखने को मिल रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिला मतदाता बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुँच रही हैं।

यह रुझान सत्ता पक्ष के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि पिछले चुनावों में महिलाओं ने एनडीए को भारी समर्थन दिया था।

🧠 प्रचार की झलकियाँ और प्रमुख मुद्दे:

दूसरे चरण के प्रचार के दौरान नेताओं ने कई मुद्दों को उठाया —

एनडीए ने विकास, स्थिरता और डबल इंजन सरकार पर भरोसा जताया।

महागठबंधन ने रोजगार, शिक्षा, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों को मुख्य बनाया।

मनीष कश्यप जैसे युवा उम्मीदवारों ने जन-संपर्क और सोशल मीडिया को चुनावी हथियार बनाया।

शहरों से लेकर गांवों तक, हर जगह चाय चौपाल, नukkad बैठकें, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं को जोड़ा गया।

🗳️ 11 नवंबर को होगा फैसला:

अब मतदाता की बारी है —

11 नवंबर को सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा।

मतदान के बाद ईवीएम में बंद हो जाएगी 122 सीटों के उम्मीदवारों की किस्मत।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि दूसरे चरण के नतीजे बिहार के पूरे चुनावी समीकरण को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।

यदि पहले चरण जैसी वोटिंग हुई, तो यह एनडीए के लिए बढ़त का संकेत होगा;

लेकिन यदि विपक्ष ने अपने वोटरों को संगठित किया, तो मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।

📉 राजनीतिक समीकरण और जनता का मूड:

पहले चरण के बाद जनता में सरकार के प्रति न तो गुस्सा है, न ही बेपरवाही।

लोग स्थिरता चाहते हैं — और यही भाव एनडीए के लिए सकारात्मक माहौल बनाता है।

हालांकि, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दों ने कुछ वर्गों में असंतोष की हल्की लहर जरूर पैदा की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर दूसरे चरण में महिला और युवा मतदाता बड़ी संख्या में वोट करते हैं,

तो इसका सीधा लाभ एनडीए को मिल सकता है।

बिहार में चुनावी माहौल अब अपने चरम पर है।

दूसरे चरण का मतदान इस पूरे चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

दिग्गजों की प्रतिष्ठा और नए चेहरों की उम्मीदें — दोनों ही एक साथ मैदान में हैं।

पहले चरण की तरह यदि दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड वोटिंग होती है,

तो यह लोकतंत्र की जीत होगी —

और शायद वही वह संकेत भी बनेगा जो तय करेगा कि “क्या बिहार फिर-फिर एनडीए सरकार?”


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