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मोकामा हत्याकांड: दुलारचंद यादव केस में CID जांच तेज

03/11/2025  Ravishankar Kumar  41 views
मोकामा हत्याकांड: दुलारचंद यादव केस में CID जांच तेज

मोकामा दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच अब बिहार पुलिस की CID के पास है, जिसने घटनास्थल से जुटाए गए महत्वपूर्ण सुरागों और पोस्टमार्टम निष्कर्षों के आधार पर जांच तेज कर दी है. इस प्रकरण में जेडीयू उम्मीदवार और पूर्व विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी सहित कई कार्रवाइयाँ हुई हैं, जबकि पुलिस वाहन और पत्थरों जैसे भौतिक सबूतों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है.

केस का सार

घटना 30 अक्टूबर को मोकामा ताल क्षेत्र में उस समय हुई जब जन सुराज समर्थक 75 वर्षीय दुलारचंद यादव चुनाव प्रचार के दौरान प्रतिद्वंद्वी गुटों की झड़प में मारे गए. पीड़ित जन सुराज उम्मीदवार प्रियदर्शी पीयूष के समर्थन में थे, जिससे प्रकरण तुरंत चुनावी सरगर्मी का केंद्र बन गया.

CID ने जांच संभाली

बिहार पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने औपचारिक रूप से केस अपने हाथ में लिया और CID के डीआईजी जयंता कांत ने मौके पर जाकर जांच की निगरानी शुरू की. FSL टीम के साथ घटनास्थल की वैज्ञानिक पड़ताल, नमूनों का संकलन और बहु-टीम छानबीन जारी है.

फॉरेंसिक व पोस्टमार्टम निष्कर्ष

डीजीपी विनय कुमार के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि प्राथमिक मृत्यु-कारण हृदय और फेफड़ों को ब्लंट ट्रॉमा से हुए शॉक के कारण कार्डियोरेस्पिरेटरी फेल्योर था, न कि गोली लगना. मृतक के पैर में गोली का निशान मिला, परंतु वह घातक चोट नहीं थी; घातक चोट छाती पर वाहन चढ़ने से हुई बताई गई है. तीन डॉक्टरों के पैनल ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करीब दो घंटे शव परीक्षण किया और विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन किया गया.

सुराग और संभावित साजिश

जांच में ऐसे पत्थर मिले जो सामान्यतः रेलवे ट्रैक पर उपयोग होते हैं और मोकामा ताल क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से नहीं मिलते, जिससे हमले की पूर्व-योजना की आशंका की जांच हो रही है. पुलिस उन क्षतिग्रस्त वाहनों के डैमेज पैटर्न, पत्थर के निशान तथा मोबाइल लोकेशन और CCTV फुटेज के साथ-साथ एक संदिग्ध वाहन की पहचान में जुटी है, जिसने टक्कर मारी होने की संभावना जताई गई है.

गिरफ्तारियाँ और न्यायिक स्थिति

पटना पुलिस ने जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह को उनके दो सहयोगियों मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के साथ गिरफ्तार किया, जिन्हें चश्मदीद बयानों और प्राथमिक जांच के आधार पर आरोपी बनाया गया है. इसके बाद अदालत ने अनंत सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि पुलिस रिमांड और आगे की पूछताछ की तैयारी कर रही है.

FIR के दावे और कथन

एफआईआर में दावा है कि अनंत सिंह ने फायरिंग की और घटनास्थल पर थार वाहन के इस्तेमाल का उल्लेख सामने आया, जिसकी जांच हो रही है. दूसरी ओर, अनंत सिंह ने मीडिया में स्वयं को घटना-स्थल से दूर बताया और प्रतिद्वंद्वियों पर साजिश के आरोप लगाए, परंतु पुलिस प्रारंभिक निष्कर्षों को आधार मानकर केस आगे बढ़ा रही है.

चुनावी व संस्थागत प्रतिक्रिया

घटना ने चुनावी माहौल में सुरक्षा और आचार संहिता के पालन पर सवाल उठाए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने हिंसा के प्रति शून्य-सहनशीलता का संदेश देते हुए निष्पक्ष मतदान कराने का भरोसा दिलाया. डीजीपी ने भी कहा कि CID टीम गठित कर दी गई है और दोषियों की पहचान के लिए हर कोण से जांच की जा रही है.

आगे की दिशा

CID की प्राथमिकता घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक सुरागों, CCTV व मोबाइल डेटा, और वाहन की फॉरेंसिक ट्रेल के जरिए घटना के क्रम को री-कंस्ट्रक्ट कर साजिश के तत्वों की पुष्टि करना है. पुलिस वाहन की खोज, पत्थरों की उत्पत्ति की पुष्टि, और नए चश्मदीद व डिजिटल एविडेंस के आधार पर आरोप-पत्र की दिशा तय करेगी, जिससे जल्द खुलासा संभव हो सकेगा


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